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Wednesday, June 27, 2012
आज धुप में एक सकूं है,
पर छाए में एक चुभन है.
आज सूखे मे एक नमी है,
पर बारिश मे धरा बंजर है.
आज शरीर शांत है,
पर आत्मा गतिमान है.
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Mukesh Tripathi
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